बायो फ़र्टिलाइज़र (जैव उर्वरक) क्या है- प्रकार, प्रयोग व लाभ

रासायनिक खाद के लगातार और असंतुलित प्रयोग से हमारी कृषि भूमि और वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. मिट्टी में जीवांश की मात्रा घटने से उसकी उपजाऊ सकती घटती जाती है. हमारे जलाशयों और जमीन का पानी दूषित होता है. बायो फ़र्टिलाइज़र (Bio Fertilizer) से काफी हद तक इसकों नियंत्रित किया जा सकता है.
आज हम जानेंगे की जैव उर्वरक क्या है , कृषि में जैव उर्वरक का क्या महत्व है , जैव उर्वरकों के फसल उत्पादन में अनुप्रयोग का अध्ययन , जैव उर्वरक बनाने की विधि , जैव उर्वरक के उदाहरण in hindi में जानेंगे

जैव उर्वरक क्या है What is Biofetilizer in Hindi

जैव उर्वरक विशिष्ट प्रकार के जीवाणुओं का समूह है जो तरल या कम्पोस्ट के रूप में पौधों को दिया जाता है. यह मिट्टी में पौधों को अनुपलब्ध अवस्था से उपलब्ध अवस्था में बदल देता है. जैव उर्वरक के प्रयोग से रासायनिक उर्वरकों की एक तिहाई मात्रा तक की बचत हो जाती है. नाइट्रोजन पूर्ति करने वाले ये जैव उर्वरक प्राकृतिक रूप से सभी दलहनी फसलों और सोयाबीन, मूंगफली आदि की जड़ों में छोटी-छोटी गांठो में पाए आते हैं. जो सहजीवन के रूप में कार्य करते हुए वायुमंडल में मौजूद नाइट्रोजन को पौधों तक पहुंचाते हैं.

जैव उर्वरक के नाम

बायोफ़र्टिलाइज़र (Bio Fertilizer) को जीवाणु खाद भी कहते है क्योंकी बायो फ़र्टिलाइज़र एक जीवित उर्वरक है, जिसमें सूक्ष्मजीव विद्यमान होते है. जो फसलों में बायो फ़र्टिलाइज़र इस्तेमाल करने से वायुमंडल में उपस्थित नाइट्रोजन पौधों को अमोनिया के रूप में आसानी से उपलब्ध होती है. और मिट्टी में पहले से उपस्थित अघुलनशील फास्फोरस व पोषक तत्व घुलनशील अवस्था में परिवर्तित होकर पौधों या फसल को आसानी से उपलब्ध होते है. क्योंकी जीवाणु प्राकृतिक है, इसलिए इनके प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है, और जीवों के स्वस्थ्य और पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव नही पड़ता. बायो फ़र्टिलाइज़र रासायनिक उर्वरकों के पूरक है, विकल्प नही है.

जैव उर्वरक के प्रकार । Types of Bio Fertilizer

पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए तथा रासायनिक खादों के प्रभाव को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने प्रकृतिप्रदत्त जीवाणुओं को पहचान कर उनसे विभिन्न प्रकार पर्यावरण हितैसी बायो फ़र्टिलाइज़र तैयार किए है, वो इस प्रकार है.

राइजोबियम । Rhizobium

राइजोबियम बायो फ़र्टिलाइज़र को मुख्य रूप से सभी तिलहनी और दलहनी फसलों में सहजीवी के रूप में रहकर पौधों को नाइट्रोजन की पूर्ति करता है. राइजोबियम को बीजों के साथ मिश्रित करने के पश्चात बो देने पर जीवाणु जड़ों में प्रवेश करके छोटी छोटी गाठें बना लेते है. इन गाठों में जीवाणु बहुत अधिक मात्रा में रहते हुए, प्राकृतिक नाइट्रोजन को वायुमंडल से ग्रहण करके पोषक तत्वों में परिवर्तित कर के पौधों को उपलब्ध करवाते है. पौधों की जितनी अधिक गाठें होती है, पौधा उतना ही स्वस्थ होता है. इसका उपयोग जैसा की दलहनी और तिलहनी फसलों जैसे चना, मुंग, उड़द, अरहर, मटर, सोयाबीन, सेम, मसूर और मूंगफली आदि में किया जाता है.

एजोटोबैक्टर । Azotobacter

एजोटोबैक्टर मिट्टी और जड़ों की सतह में मुक्त रूप से रहते हुए वायुमंडलिए नाइट्रोजन को पोषक तत्वों में परिवर्तित करके पौधों को उपलव्ध करवाता है. एजोटोबैक्टर सभी गैर दलहनी फसलों में प्रयोग होता है.

अजोस्पिरिल्लुम । Azospirillum

वैक्टैरिया और नीले हरे शैलाव जैसे कुछ सूक्ष्म जीवों में वायुमंडलीय नाइट्रोजन का उपयोग करने और फसली पौधों को इस पोषक तत्व को उपलब्ध कराने की क्षमता होती है. यह खाद मक्का, जौ, जई और ज्वार चारा वाली फसलों के लिए एक टिका है. इसे फसल उत्पादन की क्षमता 5 से 20 प्रतिशत बढ़ जाती है. बाजरा की उत्पादन क्षमता 30 और चारा वाली फसलों की 50 प्रतिशत तक बढ़ सकती है.

नीले हरे शैवाल । Blue-Green Algae

चावल के लिए बायो फ़र्टिलाइज़र के रूप में नीले हरे शैलाव का उपयोग बहुत ही लाभदायक है. यह चावल के लिए यह नाइट्रोजन और पोषक तत्वों का भंडार है, और यह मिट्टी की क्षारीयता को भी कम करने में मदद करता है.

म्यचोर्र्हिजाई Mycorrhizae

यह संवहनी पौधों की जड़ों के साथ कवक के शहसंम्भव संयोजन है, यह फास्फोरस को तेजी से बढ़ाने में उपयोगी है. यह फल वाली फसलों के लिए पैदावार में बहुत फायदेमंद है जैसे पपीता.

फास्फोरस विलायक जीवाणु Phosphorus Solvent Bacteria

पी. एस. बी. मिट्टी के अंदर की अघुलनशील फास्फोरस को घुलनशील फास्फोरस में परिवर्तित पौधों को उपलब्ध करता है, इसका उपयोग सभी फसलों में किया जा सकता है, यह फास्फोरस की कमी को पूरा करता है.

बायो फ़र्टिलाइज़र जैव उर्वरकों की प्रयोग विधि Method of Uses of Bio Fertilizer

जैव उर्वरक के उपयोग

बीज उपचार विधि Seeds Treatment Method

बायो फ़र्टिलाइज़र के प्रयोग की यह सबसे अच्छी विधि है. 1 लिटर पानी मे लगभग 100 से 110 ग्राम गुड़ के साथ जैव उर्वरक अच्छी तरह मिलकर घोल बना ले, इसको 20 किलोग्राम बीज पर अच्छी तरह छिड़क कर बीजों पर इसकी परत बना दे, इसके बाद इसको छायादार जगह पर सुखा दे, जब बीज अच्छे से सुख जाए उसके तुरंत बाद इसकी बिजाई कर दे.

कंद उपचार विधि Tuber Treatment Method

गन्ना, आलू, अरबी और अदरक जैसी फसलों में बायो फ़र्टिलाइज़र के प्रयोग के लिए कन्धों को उपचारित किया जाता है. 1 किलोग्राम एजोटोवेक्टर और 1 किलोग्राम फास्फोरस विलायक जीवाणु का 25 से 30 लिटर पानी में घोल तैयार कर ले, इसके बाद कन्दों को 10 से 15 मिनट घोल में दूबों दे और फिर निकाल का रोपाई कर दे.

पौध जड़ उपचार विधि Plant Root Treatment Method

धान और सब्जी वाली फसलें जिनके पौधे की रोपाई की जाती है जैसे टमाटर, फूलगोभी, पत्तागोभी और प्याज इत्यादि फसलों में पौधों की जड़ों को जैव उर्वरकों द्वारा उपचारित किया जाता है. इसके लिए चौड़ा और खुला बर्तन ले अब इसमें 6 से 8 लिटर पानी ले, 1 किलोग्राम एजोटोबैक्टर और 1 किलोग्राम फास्फोरस विलायक जीवाणु व 250 से 300 ग्राम गुड़ मिलाकर घोल बना ले. इसके बाद पौध को उखाड़ कर उसकी जड़े साफ कर ले और को 70 से 100 पौधों के बंडल बना ले और अब उनको जैव उर्वरक के घोल में 10 से 15 मिनट के लिए डुबो दे और निकाल कर तुरंत रोपाई कर देते है.

मिट्टी उपचार विधि Soil Treatment Method

5 से 10 किलोग्राम बायो फ़र्टिलाइज़र फसल के अनुसार, 80 से 100 किलोग्राम मिट्टी या कम्पोस्ट खाद का मिश्रण कर के 10 से 12 घंटे के लिए छोड़ दे, इसके बाद अंतिम जुताई में खेत में मिला दे.

बायो फ़र्टिलाइज़र या जैव उर्वरक के लाभ Benefits of Bio Fertilizer

1. बायो फ़र्टिलाइज़र (जैव उर्वरक) जमीन की उर्वरा शक्ति को बढ़ाता है.

2. इनके प्रयोग से अंकुरण जल्दी होता है और पौधे की टहनियों की संख्या में बढ़ोतरी होती है या फुटाव ज्यादा होता है.

3. यह रासायनिक खादों का विशेष रूप से नाइट्रोजन और फास्फोरस का लगभग 15 से 25 प्रतिशत हिस्से की आपूर्ति होती है.

4. मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ ह्यूमस में वृद्धि, मिट्टी की भौतिक और रासायनिक स्थिति में सुधार होता है.

5. इनके प्रयोग से फसलों में 10 से 15 प्रतिशत उत्पादन में वृद्धि होती है.

6. बायो फ़र्टिलाइज़र (Bio Fertilizer) से तिलहन फसलों के तेल में वृद्धि भी होती है.

7. मिट्टी की क्षारीय स्थिति में भी सुधार देखने को मिलता है.

बायो फ़र्टिलाइज़र या जैव उर्वरकों के प्रयोग में सावधानियां 

1. जैव उर्वरक खरीदते समय उर्वरक का नाम, प्रयोग होने वाली फसल और अंतिम तारीख अवश्य जांचे.

2. बायो फ़र्टिलाइज़र को हमेशा छायादार स्थान पर ही रखें.

3. जैव उर्वरक को तारीख समाप्ति के बाद बिलकुल भी प्रयोग नही करें.

4. फसल के अनुसार ही जैव उर्वरक का चुनाव करे नही तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है.

5. फसल और कम्पनी के मापदंड़ो के अनुसार खाद का प्रयोग उचित मात्रा में करें.

इस तरह आप जैव खाद का प्रयोग कर के आपने खेत, पानी, पर्यावरण और स्वास्थ्य को बचा सकते है व अपनी फसल का उत्पादन कम लागत में ज्यादा ले सकते है.

FAQ

जैव उर्वरक कितने प्रकार के होते हैं ?

6 प्रकार के होते हैं.

जैव उर्वरक क्या है उदाहरण दीजिए ?

राइजोबियम बायो फ़र्टिलाइज़र

जैव उर्वरक के क्या लाभ है?

इन जैव उर्वरकों के जीवाणु बीमारी फैलाने वाले रोगाणुओं का दमन करते हैं जिससे फसलों का बीमारियों से बचाव होता है तथा पौधों में रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ती है। ऐसे जैव उर्वरकों को प्रयोग करने से जड़ों एवं तनों का अधिक विकास होता है, जिससे पौधों में तेज हवा, अधिक वर्षा एवं सूखे की स्थिति को सहने की क्षमता बढ़ जाती है।

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