लाखों रुपये का रिटर्न भरता है यह किसान, ‘व्हाइट हाउस’ में रहता है

Success Story of Indian farmer आपने ‘मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे-मोती’ गाना जरूर सुना होगा. फिल्म उपकार का यह गीत करीब 4 दशक पहले आया था. लेकिन, बाराबंकी में यह आज चरितार्थ होता नजर आ रहा है. हम आपको रामसरन वर्मा के बारे में बताने जा रहे हैं, जो मिट्टी से सोना उगा रहे हैं. 54 साल के रामसरन उत्तर प्रदेश में बाराबंकी के छोटे से गांव दौलतपुर में रहते हैं.

महंगा चश्मा, महंगी शर्ट और विदेशी नस्ल के कुत्तों के भी दीवाने हैं यह प्रगतिशील किसान

खेती से कर रहे हैं शानदार कमाई
रामसरन वर्मा ने खेती-किसानी से जुड़ी धारणा बदल दी है. वे दूसरे किसानों के लिये प्रेरणास्रोत बन गए हैं. इसकी वजह है खेती-किसानी से जोरदार कमाई. वे कई चीजों की खेती करते हैं. उनका दावा है कि एक एकड़ टमाटर की खेती से करीब 3 लाख रुपये कमाएं जा सकते हैं. इसी तरह से आलू से 80 हजार और मेंथा से 60 हजार प्रति एकड़ की कमाई जा सकती है.

किसानों की कर्ज माफी के खिलाफ हैं रामसरन
किसानों की कर्जमाफी योजना के खिलाफ हैं रामसरन. उन्होंने कहा कि सरकार को कर्ज माफी की जगह किसानों को नियमित तौर पर आर्थिक मदद उपलब्ध कराना चाहिए. इससे किसानों को बुआई के लिये कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी. उन्होंने कहा कि पीएम किसान योजना मोदी सरकार की अच्छी स्कीम है.

80 के दशक से कर रहे हैं खेती
रामसरन वर्मा 1986 से खेती कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि हमने 6 एकड़ से खेती की शुरुआत की थी. अभी वे 300 एकड़ ..

वे 300 एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं. आज करीब 50 हजार किसान उनसे जुड़े हैं. उनकी इस कोशिश को सरकार ने भी सराहा है. उन्हें इस साल पदमश्री पुरस्कार से नवाजा गया है.

आत्महत्या नहीं खेती का तरीका बदलें किसान

आत्महत्या कर रहे किसानों को वर्मा की सलाह है कि किसानों को परंपरागत खेती (गेहूं और तिलहन दलहन बगैरह ) की जगह कैश क्राप यानी मेंथा, आलू, केला, स्ट्रॉबेरी और एलोवेरा जैसी फसलों का रुख करना चाहिए. उन्होंने बताया कि किसान उनकी बेवसाइट www.vermaagri.com के जरिये खेती की नई तकनीक के बारे में जानकारी ले सकते हैं.

शान-शौकत के साथ रहते हैं वर्मा जब भी किसान की बात होती है हमारे जेहन में मटमैले कपड़े पहने किसान की तस्वीर सामने आती है. लेकिन रामसरन वर्मा काफी शान-शौकत के साथ रहते हैं. कुछ मामलों में तो वह शहरी जीवन-शैली को भी मात देते हैं. इनका घर न सिर्फ आलीशान है बल्कि घर में कई लग्जरी सुविधाएं हैं. गांव में बने इस घर में हर सुख-सुविधा है. व्हाइट-हाउस की तरह दिखने वाला उनका घर कई मामलों में अनोखा है. महंगा चश्मा, महंगी शर्ट और विदेशी कुत्ते के दीवाने वर्मा बताते हैं कि उन्हें ब्रांडेड कपड़ों और दूसरे सामानों का काफी शौक है. वह एक खास ब्रांड की शर्ट पहनते हैं. वे बताते हैं कि इसकी कीमत भी 3000-4000 रुपये के करीब है. रामसरन को विदेशी नस्ल के कुत्ते पालने का शौक है. उनके पास विदेशी प्रजाति के दो कुत्ते हैं

गरीबी के चलते छोड़ दी थी पढ़ाई गरीबी के चलते वर्मा को पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी. वह सिर्फ आठवीं पास हैं. लेकिन उन्होंने कम लागत में ज्यादा उत्पादन का तरीका खोजा. आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर वे टमाटर, केला, मेंथा और आलू की खेती करते हैं. इसके चलते वे औसत के मुकाबले दोगुना से चार गुना तक उत्पादन हासिल करते हैं. 30 लाख का आईटीआर भरते हैं रामसरन ने बताया कि उनकी सालाना आमदनी काफी अच्छी है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे सालाना 30 लाख रुपये का इनकम टैक्स रिटर्न भरते हैं. वे उन किसानों के लिए प्रेरणास्रोत हैं, जो खेती-किसानी को घाटे का सौदा मानते हैं.

Gobar paint training and factory subsidy

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