मशरूम की खेती की ट्रेनिंग | Mushroom Cultivation Training By Government [ऑनलाइन पंजीकरण]

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे ऐसे कई राज्य है जहाँ किसान इसका प्रशिक्षण प्राप्त कर मशरूम की सफल खेती कर रहे हैं। यदि आप भी मशरूम की खेती कर अपनी आय बढ़ाना चाहते है, तो सरकार और संस्थानों द्वारा मिलने वाले प्रोत्साहनके फलस्वरुप अपने इस सपने को पूरा कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं कि मशरूम की खेती की ट्रेनिंग या प्रशिक्षणऔर Mushroom Cultivation Training By Government [ऑनलाइन पंजीकरण] के बारें में पूरी जानकरी |

मशरूम की खेती

मशरूम की खेती (Mushroom Farming) से सम्बंधित जानकारी

देश के कई राज्यों में मशरूम की खेती काफी लोकप्रिय होती जा रही है। यहाँ तक कृषि क्षेत्र से जुड़े हुए लोगो का रुझान भी मशरूम की खेती की तरफ देखनें को मिल रहा है | अधिकांश किसान भाई मशरूम की खेती ( mushroom farming Business ) कर अच्छा मुनाफा कमा रहे है | मशरूम की खेती की सबसे खास बात यह है, कि इसे कम जगह या आप एक कमरे में भी शुरू कर सकते हैं।मशरूम की खेती (Mushroom Cultivation Farming) को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा इसके प्रशिक्षण की शुरुआत की है, ताकि किसान भाई मशरूम का अच्छा उत्पादन कर अपनी आय को बाधा सके |

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मशरूम क्या है (What is Mushroom)

मशरुम एक फफूंदीपौधा (Mildew Plant)है | इसे हिंदी में फुटु, खुम्भी और ढिंगड़ी आदि नामों से जाना जाता है | फफूंद का पौधा अपना भोजन दूसरे पदार्थों से ग्रहण करता है | यह आकार में छतरी और खुम्भी नुमा होता है। यह अनेक प्रकार के माध्यम जैसे पैरा कुट्टी, गेहू कुटी का उपयोग करके इसका उत्पादन किया जाता है | मशरुम की कृषि करने के लिए स्पॉन का प्रयोग किया जाता है, जिसे हम मशरूम का बीज कहते है | 

मशरुम की विश्व भर में लगभग 2 हजार से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती है और भारत में इसकी 200 से अधिक प्रजातियाँ उपलब्ध है | जिसमें से 20 से 25 प्रजातियों को खाने योग्य माना जाता है। मशरूम को खेती के लिए वातावरण में नमी का होना अत्यंत आवश्यक है | इसकी खेती के लिए 18 डिग्री से लेकर 30 डिग्री तक का तापमान अच्छा माना जाता है |

मशरूम का स्पॉन या बीज क्या है (Spawn of Mushroom)

साधारण भाषा में मशरूम स्पॉन एक ऐसा पदार्थ है, जिसे गेहूं के दानें में मायसेलियम कवक (Mycelium fungus) के विकास जाल को फैलाया जाता है। दरअसल माइसेलियमथ्रेड-जैसी कोशिकाओं (Cells) का एक संग्रह है और स्पॉन काउपयोगकिसी भी सामग्री पर माइसेलियम को स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है| जिससे मशरूम बढ़ता है और इसे पैरा कुट्टी या गेहू कुट्टीकहा जाता है।

मशरूम की खेती की ट्रेनिंग (Mushroom Cultivation Training)

मार्केट में मशरूम की मांग बढ़ने से इसके दामों में भी काफी बढ़ोत्तरी हुई है | चूँकि भारत में मशरूम की लगभग 20 से 25 प्रजातियाँ पाई जाती है | यदि आप इसकी बेहतर खेती करना चाहते है, तो सबसे पहले इसके लिए आपको प्रशिक्षण प्राप्त करना आवश्यक है | मशरूम के बेहतर उत्पादन के लिए अनेक विश्वविद्यालयों के अलावा निजी संस्थानों द्वाराट्रेनिंग प्रदान की जाती है | इसके अलावा सरकार द्वारा भी समय-समय पर शिविर लगाकर प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाती है।

देश के अधिकांश राज्यों में इस समय मशरूम की व्यवसायिक खेती की जा रही है | यदि मशरूम की खेती की ट्रेनिंग लेने के बाद की जाये तो आपको निश्चित रूप से सफलता मिलेगी | मशरुम की खेती की एक वैज्ञानिक विधि है। अतः इसके लिए प्रशिक्षण अर्थात ट्रेनिंग की आवश्यकता पड़ती है | मशरुम की खेती करनें के लिए ट्रेनिंग / प्रशिक्षण इन संस्थाओ से प्राप्त कर सकते है |

ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (Rural Self Employment Training Institute)

हमारे देश में लगभग 500 से अधिक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से मशरुम की खेती या मशरुम उत्पादन से सम्बंधित प्रशिक्षण दिया जाता है | सबसे खास बात यह है, कि यह ट्रेनिंग निःशुल्क प्रदान की जा रही है | आप अपने जिले के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (Rural Self Employment Training Institute) से ट्रेनिंग के लिए संपर्क कर सकते है |  

लाइवलीहुड कॉलेज धमतरी

यदि आप छत्तीसगढ़ राज्य के निवासी है, तो आप अपने जिले के लाइवलीहुड कॉलेज में मशरूम की खेती की ट्रेनिंग के लिए संपर्क कर सकते है । यहाँ पर यह प्रशिक्षण निःशुल्क प्रदान किया जाता है |

कृषि विज्ञान केंद्र (Agricultural Extension Center)

मशरूम की खेती की ट्रेनिंग के लिए आप अपने जिले में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते है | यहाँ पर आपको कृषि वैज्ञानिक द्वारा ट्रेनिंग दी जाती है | यह ट्रेनिंग अर्थात प्रशिक्षण बिना किसी शुल्क लिए प्रदान किया जाता है। अधिक जानकारी व प्रशिक्षण प्राप्त करनें के लिए आप अपने जिले के कृषि विज्ञानं केंद्र में संपर्क कर सकते है।

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खुम्ब अनुसंधान निदेशालय, सोलन (हिमाचल प्रदेश)

खुम्ब अनुसंधान निदेशालय (Directorate of Mushroom Research – DMR) को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत रखा गया है। इसका हेड ऑफिस सोलन, हिमाचल प्रदेश में है। इस संस्थान की स्थापना मुख्य रूप से मशरूम के हर पहलू पर अनुसंधान करने के साथ ही प्रशिक्षण प्राप्त करनें वाले उत्पादकों को प्रशिक्षण प्रदान करना है।

डीएमआर (DMR) के अंतर्गत पूरे देश में अखिल भारतीय समन्वित मशरूम परियोजना संचालित की जा रही है। आप यहां से मशरूम की खेती से संबंधित समस्त जानकारियां और ट्रेनिंग प्राप्त कर सकते है। इसके अलावा आप इन प्रशिक्षण संस्थानों से ट्रेनिंग प्राप्त कर सकते है|

1.महाराणा प्रताप कृषि व तकनीकी विश्वविद्यालय
2.नारायण देव कृषि व तकनीकी विश्वविद्यालय
3.पंजाब कृषि विश्वविद्यालय
4.बागवानी व कृषि वानिकी अनुसंधान कार्यक्रम
5.इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय
6.मध्य प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय राहुरी
7.राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय
8.चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय
9.उड़ीसा कृषि विश्वविद्यालय
10.भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद
11.गोविंद बल्ब पंत कृषि व तकनीकी विश्वविद्यालय
12.तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय
13.केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय
14.केरल कृषि विश्वविद्यालय
15.हरियाणा एग्रो-इंडस्ट्रीयल कॉरपोरेशन आर एंड डी सेंटर

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मशरूम की खेती की ट्रेनिंग के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें

आप डीएमआर की अधिकारिक वेबसाइट https://www.iihr.res.in/online-training-mushroom-spawn-production-and-mushroom-cultivation-%E2%80%98-duration-6-daysपर जाकर ट्रेनिंग से सम्बंधित जानकारी प्राप्त कर सकते है |

mushroom cultivation training center

इसके अलावा आप यहाँ से ट्रेनिंग के लिए ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि डीएमआर की तरह प्रत्येक राज्यों के संस्थानों की भी अपनी वेबसाइट हैं | जहां से आप मशरूम की खेती की ट्रेनिंग से संबंधित जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं |

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