Hydroponic farming क्या है ? Hydroponic farming से पैसे कैसे कमाये | व्यापार की योजना

आज के समय में जब चारो और कोराना वायरस का कहर चल रहा है लग रहा है जैसे सब कुछ रुक सा गया है | इस कोराना से बचने के लिए सब और सिर्फ एक ही बात कहि जा रही है , अपनी इंम्यूनिटी पावर बढ़ाने के बारे में ये तो हुई एक बात लेकिन इसके अलावा एक बात और भी है की जो भी सब्जियाँ या फ्रूट आजकल हम खाते है वो सब केमिकल फार्मिंग से निर्मित होते है इसलिए ये न तो पौस्टिक होते है और न ही स्वाद में अच्छे होते है | 

तो अब बात आती है की कैसे हम वो सब्जियाँ या फल प्राप्त करे जो की पौस्टिक हो और खाने में स्वादिस्ट हो जिससे वास्तव में हमारी इम्युनिटी पावर बढ़ सके | तो अगर हम कम पैसे और कम पानी में कोई ऐसी फार्मिंग  तकनीक का इस्तेमाल करके ऐसी सब्जिया और फल मिले जो की केमिकल रहित हो तो केसा रहे |  इस प्रकार की जो फार्मिंग होती है उसे कहते है हाइड्रोपोनिक फार्मिंग ( Hydroponic farming in Hindi ) | तो आज हम जानेगे कैसे हम hydroponic farming से केमिकल रहित और हेल्थी सब्जिया और फल प्राप्त कर सकते है | 

तो आज हम बात करेंगे की hydroponic farming क्या है , hydroponic farming कैसे करते हैं और hydroponic farming  से पैसे कैसे कमाये जाते है | 

Contents

Hydroponic farming क्या है ?

Hydroponic farming बिना मिटी का उपयोग किये हुए कम पानी में की जाने वाली खेती है | इजराइल ने इस तरह की फार्मिंग को चालू किया था उसके बाद में ये समय के साथ हर जगह की जाने लगी | 

हाइड्रोपोनिक फार्मिंग की खास बात ये है की इसमें मिटी का प्रयोग बिलकुल नहीं होता है और तो और इसमें जो पानी उपयोग किया जाता है वो भी बहुत कम मात्रा में उपयोग किया जाता है | सभी प्रकार के जो पोषक तत्व है वो इसी पानी में मिलाये जाते है | 

हाइड्रोपोनिक फार्मिंग में हम कम समय और कम जगह में अच्छी और पोषक फसल तैयार कर सकते है इस फार्मिंग को हम इनडोर और आउटडोर दोनों जगह पर कर सकते है |  

हाइड्रोपोनिक फार्मिंग में की जाने वाली फसल कम जगह में ज्यादा होती है और ये खेती पूरी तरह से एक पोर्टेबल खेती होती है | 

Hydroponic farming कैसे करते है ?

हाइड्रोपोनिक फार्मिंग आज की जरुरत है क्योकि एक तो जनसँख्या बढ़ती जा रही है दूसरा पानी की कमी है इसके अलावा जो सब्जियाँ और फल हम अभी खा रहे है वो सब केमिकल से बने हुए होते है जिसे केमिकल फार्मिंग कहते है जिसमे न तो पोसटिकता है और न ही स्वाद  बल्कि इनसे हमारे स्वास्थय को भी हानि पहुँचती है | हाइड्रोपोनिक फार्मिंग इन सब चीज़ो का एक बहतरीन समाधान है क्योकि न तो इसमें कोई केमिकल उपयोग में लिए जाते है न ही ज्यादा मात्रा में पानी उपयोग होता है इसके अलावा इसमें वातावरण को भी नियंत्रित किया जा सकता है | यह फार्मिंग आउटडोर और इंडोर दोनों तरह से की जा सकती है इसलिए इसे काफी हद तक वातावरण में होने वाले दुष्प्रभावो से बचाते है | इसलिए जैसे मौसम ख़राब होने पर खेतो में फसले ख़राब हो जाती है वो इसमें नहीं होती है | 

हाइड्रोपोनिक फार्मिंग के अंदर जो स्ट्रक्चर होता है उसमे पाइप लगी होती है उसमे होल होते है इसमें हम कोकोपिट की सहायता से पौधे डालते है और इस पाइप में 24 घंटे पानी चलता रहता है एक साइड से पानी डाला जाता है और दूसरी साइड से पानी निकलता है फिर वही पानी उसी पानी के टैंक में वापस चला जाता है फिर वो पानी ही मोटर की सहायता से वापस उसी पाइप में आ जाता है और ये प्रोसेस निरन्तर चलती रहती है | इस पानी के अंदर पोषक तत्व मिले होते है जो की हमारे उगाये गए या डाले गए बीजो को मिलते रहते है | इसी से हमारी जो फसल है वो ग्रो होती रहती है | 

यही तरीका होता है एक हाइड्रोपोनिक फार्मिंग करने का इसमें हम हमारे अकॉर्डिंग सेटअप तैयार कर सकते है बजट और जगह के अकॉर्डिंग | इस खेती की खास बात ये होती है की ये कम जगह में भी अछि पैदावार देती है जैसे 100 गज के प्लाट में आपको 1 एकड़ जितनी फसल मिल जाएगी | 

Rooftop hydroponic farming | Rooftop farming 

हम इस प्रकार की खेती को हमारी खाली पड़ी छत पर भी कर सकते है क्योकि इसमें मिटी की आवशयकता तो होती नहीं है दूसरी ये एक पोर्टेबल खेती है जिसे हम कमरे में भी कर सकते है आर्टिफिसियल लाइट के सहायता से पूरी तरह से नियंत्रित वातावरण में | 

इसके लिए जो टेम्प्रेचर होना चाहिए वो है 25 से 30 डिग्री का और आद्रता लगभग 80 % होनी चाहिए 

आजकल rooftop फार्मिंग बहुत ज्यादा पॉपुलर होती जा रही है इसके बने बनाये सेटअप मिलते है या हम इसे बना भी सकते है | rooftop hydroponic farming (रूफटॉप हाइड्रोपोनिक फार्मिंग) बहुत से लोग शौकिया भी करते है और बहुत से लोग बिज़नेस की तरह से लेकर भी करते है | 

Vertical hydroponic farming (खड़ी हाइड्रोपोनिक फार्मिंग )

ये कोई प्रकार नहीं है बल्कि कम जगह पर अधिक मात्रा में फसल तैयार करने का एक तरीका है इसमें जो स्ट्रक्चर तैयार किया जाता है वो एक पिरामिड टाइप स्ट्रक्चर होता है जिसमे हम फसले लगाते है जैसे मानिये एक पाइप में 10 पौधे लगते है और हमने एक 7 पाइप का 4 लेयर वाला स्ट्रक्चर तैयार किया तो उसमे हमे मिला 70 पौधे मतलब लगभग उतनी ही जगह में काम करके हमने 7 गुना ज्यादा फसल तैयार करी | 

यही सबसे अच्छा फायदा होता इस फार्मिंग के मॉडल का क्योकि एक तो इसमें सम्पूर्ण पोषक तत्व मिले होते है अगर मिट्टी में खेती की जाये तो ये जरुरी नहीं की उसमे सारे पोषक तत्व मिले | और दूसरी कम जगह पर अधिक खेती की जा सकती है | 

वर्टिकल फार्मिंग का जो कांसेप्ट है वो मुखयतः कम जगह पर अधिक खेती के लिए ही आया है इसी लिए इसे हम हमारी छत पर भी कर सकते है |  

Hydroponic farming के लिए जरुरी सामान (equipment)

इस प्रकार की फार्मिंग करने के लिए हमे हमे कई तरह के इक्विपमेंट्स की जरुरत पड़ती है ताकि इस प्रकार की किसानी की जा सके हम कुछ लिस्ट तैयार करते है –

  1. वाटर टैंक (reservoir)
  2. मोटर 
  3. एयर पंप 
  4. nutrition element (पोषक तत्व)
  5. पाइप्स (connection pipe )
  6. बीज 
  7. कोकोपिट 
  8.  ग्रो ट्रे 

वाटर टैंक (Reservoir) 

ये एक टैंक होता है जिसमे फ्रेश पानी और पोषक तत्वों का घोल मिला होता है | इससे पानी की सप्लाई पुरे हाइड्रोपोनिक सिस्टम में की जाती है और फिर ये पानी वापस इसी टैंक में आ जाता है और इसी प्रकार पानी 24×7 सतत चलता रहता है |

निराई गुड़ाई किसे कहते हैं  

मोटर  या pump (submersible pump)

पानी और nutrition (पोषक तत्वों) को ग्रोइंग ट्रे या चेम्बर तक ले जाने का काम ये पंप करता है जो की 24 hours निरन्तर चलता रहता है | ये एक बहुत ही उपयोगी उपकरण है इस hydroponic farming में क्योकि अगर आपका ये पंप या मोटर ख़राब हो गई तो हमारी फसल ख़राब होने के चांस बन जाते है क्योकि ये खेती पूरी तरह से पानी पर डिपेंड होती है अगर पानी बंद तो खेती बंद | 

Air pump and timer (एयर पंप और टाइमर)

मिटी वाली खेती में जो फसले ग्रो करती है वो अपनी ऑक्सीजन धरती में मौजूद एयर पॉकेट्स से लेती है लेकिन हमारे इस फार्मिंग की तकनीक में हम एक एयर पंप लगाते है टाइमर के साथ जो की समय समय पर चलता रहता है और हमारी फसलों के लिए जरुरी हवा (ऑक्सीजन ) का निर्माण करता रहता है | 

Nutrition element (पोषक तत्व)

मिट्टी की जो खेती होती है उसमे हमारी जो फसले होती है उन्हें वहा से पोषक तत्व मिलते रहते है लेकिन इस पानी की खेती में जो पोषक तत्व होते है वो हमे तैयार करके एक घोल के रूप में बनाते है और कुछ बूंदो को महीने में एक या दो बार ही डालते है इसे हम हमारे उस वाटर टैंक में ही डाल देते है | 

कनेक्शन पाइप्स (Connection Pipe)

ये पाइप, कनेक्शन करने का काम करती है इसी से हम वाटरटैंक से पानी की सप्लाई होती है और पानी एक ग्रौचेम्बर से दूसरे grow chamber में  जाता है और सारा पानी आखिर में इन्ही connection पाइप के जरिये  वाटर टैंक तक पहुंच जाता है | 

बीज (Seed)

बीज के बिना हम कोई भी खेती चालू नहीं करते है बीज को प्राप्त करने के लिए हम नजदीकी सहकारी विभाग जो कि किसानो को बीज प्रोवाइड करवाता है या फिर कोई खाद बीज की दुकान जहां हम उच्च गुणवत्ता की बीज लेकर के हम हाइड्रोपोनिक फार्मिंग की शुभ शुरुआत करने के लिए तैयार हो जाते है |  

कोकोपिट (Coco-pit)

ये सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है क्योकि आप इस खेती में मिट्टी की जगह इसी का उपयोग करते है ये नारियल के छिलके होते है | 

pH मीटर 

जब हम नुट्रिशन तैयार करते है तो इसका pH सही है की नहीं ये नापना बेहद जरुरी है और ये हम pH मीटर की सहायता  से ही नाप सकते है | इसलिए हमारे पास pH मीटर का होना बेहद जरुरी है | 

TDS मीटर 

पौधो में जो नुट्रिशन दिया जाता है उसका TDS सही होना भी बेहद जरुरी है और जब हम सारे नुट्रिशन मिलाकर घोल तैयार करते है तो उसका टीडीएस लेवल एक दम सही होना चाहिए इसलिए हमे TDS मीटर का होना बेहद जरुरी है | 

वेट मशीन 

ये वजन करने वाली मशीन है इसमें हम पोषक तत्वों को नाप नाप के डालते है ताकि कोई भी पोषक तत्व कम या ज्यादा ना हो जाये | 

ग्रो ट्रे 

ग्रो ट्रे मुखयतः बीजो को ग्रो करने के काम आती है | 

Aquaponics Farming in Hindi

Hydroponic farming में पाए जाने वाले पोषक तत्व

हाइड्रोपोनिक फार्मिंग में हम वो सभी पोषक तत्व काम में लेते है जो की मिट्टी की खेती में काम आते है | चुकी ये सभी चीज़े मिट्टी की खेती में पौधो को मिट्टी से मिल जाती है लेकिन हाइड्रोपोनिक खेती में हमे इन्हे निश्चित मात्रा में तैयार करते है और इन्हे RO पानी के साथ फिक्स pH और फिक्स TDS को मैनेज करके तैयार करते है | 

पानी की खेती की सबसे खास बात ये है की इसमें हम सभी पोषक तत्व सही मात्रा में काम में लेते है और सारे पोषक तत्व काम में ले लेते है जबकि मिटटी में हमे सारे पोषक तत्व मिले ये जरुरी नहीं इसके अलावा उनकी मात्रा कम्पलीट हो ये भी जरुरी नहीं इसलिए मिटटी की खेती में हमे सम्पूर्ण पोषकता मिले ये जरुरी नहीं है | 

पानी की खेती में पोषक तत्व हमारे कण्ट्रोल में होते है इसलिए हम पुरे पोषक तत्व सही मात्रा के साथ काम में लेते इसलिए इससे बनी फसल खाने में पोषक और स्वादिस्ट होती है | 

पोषक तत्व 

नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटैशियम (K), कैल्शियम (Ca) फॉर्म इन कैल्शियम नाइट्रेट 

मैग्नीशियम  (Mg), सल्फर (S)  दोनों पोषक तत्व इसमें मैग्नीशियम सलफेट के रूप में लेते है (MgSO4)

Micro-nutrient 

कुछ ऐसे पोषक तत्व होते है जो की कम मात्रा में यूज़ में लिए जाते क्योकि अधिक मात्रा में काम में लेते है तो ये जहरीले हो जाते है | 

आयरन (Fe), क्लोरीन (Cl), कॉपर (Cu), जिंक (Zn), बोरोन (B), मोलीब्डनम (MO), मॅग्नीज़ (Mn)

Vertical Farming in Hindi

Hydroponic farming में  pH और TDS लेवल कैसे नियंत्रित (control) कैसे करे ?

ये खेती पूरी तरह से पानी से संचालित होती है इसलिए इसमें pH और TDS का बहुत महत्वपूर्ण रोल होता है  | क्योकि pH और TDS से ही हमे पता चलता है की पोषक तत्व पानी में बराबर मात्रा में है ना कहि पता चले pH या TDS कम या ज्यादा हो जाये | इन दोनों चीज़ो के कम ज्यादा होने से हमारी फसलों को नुकसान हो सकता है | 

दिन में कम से कम 2 बार इनका pH और TDS नाप लेना चाहिये | नॉर्मली pH 5.5 से 6.5 के बीच (हर फसल के अकॉर्डिंग pH हमेशा फिक्स रहता है ) होता है और TDS 500 के अंदर रहता है (लेकिन TDS हमारी फसलों की ग्रोथ और कितने पौधे एक स्ट्रक्चर में लगाए गए है उसके अनुसार कम या ज्यादा हो सकता है ) | 

TDS की मात्रा सर्दी और गर्मी में ज्यादा और कम होती है क्योकि सर्दी में पानी कम खर्च होता है इसलिए हमे टीडीएस ज्यादा रखना पड़ता है ताकि पोषक तत्व कम्पलीट जा सके | 

pH नियंत्रित करने के लिए हम सिट्रिक एसिड को काम में ले सकते है ये pH कम करता है इसके अलावा बेकिंग सोडा (मीठा सोडा) से pH को बढ़ा सकते है | 

टीडीएस को कण्ट्रोल में करना और भी आसान है क्योकि अगर टीडीएस बढ़ जाये तो उसमे RO का प्लेन पानी मिला ले इससे टीडीएस कम हो जाएगा और अगर बढ़ाना है तो हमारे बनाये गए solution में  नुट्रिएंट को उसी मात्रा में बढ़ाये जितना हमे टीडीएस रखना है | 

Hydroponic farming में उपयोग होने वाले कीटनाशक तकनीक

सभी प्रकार की खेती में बाकि सारी बाते कॉमन होती है जैसे मौसम , पोषक तत्व और देखभाल तरीका अलग अलग हो सकता है जैसे मिट्टी की खेती या पानी की खेती | लेकिन जो अलग होता है वो  है खेती में काम में आने वाले कीटनाशक ये वो चीज़ है जिससे हमारी खेती का प्रकार बदल जाता है | 

क्योकि जो कीटनाशक केमिकल फार्मिंग में काम में लिए जाते है उससे फसलों को तो नुकसान नहीं पहुंचते है लेकिन वो कीटनाशक मिटटी को ख़राब करते है और इसके अलावा ये कीटनाशक इस प्रकार के होते है जो फसलों पर काफी लम्बे समय तक रहते है | इसलिए जब इन से निर्मित सब्जियाँ या फलो को हम खाते है तब ये हमारे शरीर में चले जाते है और इससे हमे कई तरह की घातक बीमारिया हो जाती है जिसमे कैंसर प्रमुख है | 

इन केमिकल कीटनाशक से फल और सब्जियों की पौश्टिकता और स्वाद भी ख़त्म हो जाता है इसलिए आज कल आर्गेनिक खेती की जरुरत महसूस होने लग गयी है क्योकि इसमें इस प्रकार के कीटनाशक का प्रयोग नहीं होता है | 

हम कीटनाशक के रूप में नीम के तेल का स्प्रे कर सकते है ये बहुत ही उपयोगी तरीका है हाइड्रोपोनिक फार्मिंग में कीटो को ख़तम करने का इसके अलावा ज्यादातर खेती poly house में होती है तो कीटो से वैसे भी सुरक्षित रहती है | 

इसके अलावा हम येलो गम पैड लगा सकते है क्योकि ये कीटो को अपनी और आकर्षित करते है और इनपे लगा गम इन्हे अपने पर चिपका लेता है | 

नाईट में हम लाइट का इस्तेमाल कर सकते है लाइट भी कीटो को अपनी तरफ आकर्षित करती है | 

इन सबके अलावा कई जहरीली आर्गेनिक चीज़े होती है जिनका उपयोग करके हम कीटो को मार सकते है | ये सब जहरीली आर्गेनिक चीज़े कीटो के लिए होती है इससे लोगो को कोई नुकसान नहीं होता है और इसके अलावा ये फसलों पर केवल 24 घटो तक ही असर दिखाती है | और अगर हम इन सब्जियों को साफ पानी से धो लेंगे तो ये सब साफ हो जाते है | 

हाइड्रोपोनिक खेती में उगाई जाने वाली सब्जियाँ  | hydroponic farming vegetables and fruits 

हाइड्रोपोनिक खेती (पानी में खेती ) में हम ज्यादातर सभी प्रकार की सब्जियाँ और फल तैयार किये जा सकते है बस हर प्रकार की सब्जियों के लिए जो स्ट्रक्चर होता है वो अलग अलग हो सकता है कुछ को ग्रोइंग बैग में उगाते है कुछ को पाइप्स में तैयार करते है कुछ को वाटर पौंड में तैयार करते है सब फसलों को तैयार करने का तरीका अलग अलग होता है | 

इनसब तरीको की अच्छे से जानने के लिए आप को कुछ दिन की ट्रेनिंग लेनी चाहिए ताकि हाइड्रोपोनिक फार्मिंग के सारे कांसेप्ट क्लियर हो जाये | 

हम पानी वाली खेती में जनरली पालक , धनिया , भिंडी , टिंडी , लोकी , स्ट्रॉबेरी , मशरूम , ब्रोकली , तरबूज , टमाटर , शिमला मिर्ची , मिर्ची ,खीरा , ककड़ी और भी बहुत सी सब्जियाँ हम तैयार कर सकते है | 

इसके अलावा हम फूलो की खेती भी हम इससे कर सकते है | और हर प्रकार के फूल हम इसमें लगा सकते है | 

Hydroponic farming के स्ट्रक्चर में होने वाला खर्च 

इस बिना मिटटी की खेती के लिए हमे कुछ स्पेशल स्ट्रक्चर की जरुरत पड़ती है और एक बार सेटअप करने के पश्चात ये काफी सालो तक बिना किसी प्रॉब्लम के चल जाता है | सेटअप पर कितना खर्च आएगा इसके लिए कुछ चीज़ो के बारे में पहले पता होना चाइये तब ही इसकी कॉस्ट का मालूम चलता है और ये कोई फिक्स नहीं है अलग अलग requirement के अनुसार इसकी कॉस्ट अलग अलग हो सकती है | 

1. सेटअप कितनी बड़ी जगह पर लगाना है हम जितना बड़ा सेटअप लगाएंगे हमारी कॉस्ट उतनी ही बढ़ जाएगी लेकिन बड़े सेटअप में पर squire feet  खर्च कम आता बजाय छोटे सेटअप के इसलिए पहले कितना बड़ा सेटअप लगाना है ये decide कर लेना चाहिए | 

2. सेटअप की जगह decide होने के बाद हमे ये भी तय कर लेना चाहिए की उस सेटअप में कितने पौधे लगाने है उसके अनुसार ही हम इसकी कीमत तय कर पाएंगे | 

3. मौसम भी बहुत मैटर करता है की हमारी सेटअप की कॉस्ट कितनी होने वाली है क्योकि अगर हम जहां इस खेती को कर रहे है वहां का मौसम गर्म रहता है तो हमे उस environment को कण्ट्रोल करने के लिए वातनाकुलित पोलीहॉउस तैयार करना पड़ेगा जिसकी कॉस्ट ज्यादा होगी और ऑपरेटिंग कॉस्ट भी ज्यादा होगी | 

अगर हम किसी ऐसी जगह खेती कर रहे है जहाँ ज्यादातर तापमान एक सा रहता है 25 से 35 डिग्री के बीच का तो ऐसी जगह पर हमे नार्मल पॉलीहॉउस से काम चल जाएगा जिसमे वातावरण को ज्यादा कन्ट्रोल में करने की जरुरत नहीं है | इसकी ऑपरेटिंग कॉस्ट भी अधिक नहीं आती है | 

हम अगर बात करे 1 एकड़ की जमीन में पौधो के लिए एक हाइड्रोपोनिक फार्मिंग का स्ट्रक्चर तैयार करते है तो उसका टोटल खर्च अगर नार्मल टेम्प्रेचर के अकॉर्डिंग है तो वो लगभग 17 लाख के करीब होगा और अगर गर्म जगह की अकॉर्डिंग बात करे तो इसमें केवल पोलीहॉउस की कॉस्ट बदलेगी और इससे इसकी कॉस्ट 22 लाख के करीब हो जाएगी | 

Hydroponic farming से पैसे कैसे कमाए | हाइड्रोपोनिक खेती व्यापार की योजना

अब बात करते है की हाइड्रोपोनिक फार्मिंग में पैसे कैसे कमाए जा सकते है और इसके लिए हम किस तरह से व्यापार योजना तैयार कर सकते है | इस खेती की सबसे खास बात ये होती है की इसमें हम कम जगह में ज्यादा पैदावार प्राप्त करते है | लगभग सामान्य खेती से 1.5 गुना ज्यादा होती है | 

अब हम बात करते है जैसे चेअरी टोमेटो की खेती करते है 

2000 प्लांट हमने लगाए और एक प्लांट से हमे प्रोडक्शन प्राप्त हुआ 8 kg के approx तो टोटल प्रोडक्शन हुआ 16000 किलो का और ये खेती होती है लगभग 8 महीनो में | 

अगर चेरी टोमेटो की मार्किट रेट approx 200 रूपए किलो की होती है अलग अलग जगह के अनुसार ये रेट कम या ज्यादा हो सकती है तो इसके अकॉर्डिंग हमे 8 महीनो में 32 लाख की फसल प्राप्त हुई और इसमें से अगर हम रनिंग कॉस्ट हटा ले यानि की लागत जो की होती है कम से कम 8 लाख की तो हमारा नेट प्रॉफिट हो जाता है 24 लाख का | अगर हम मंथली बात करे तो ये हो जाता है लगभग 3 लाख का | 

महंगी सब्जिया उगाकर स्मार्ट वर्क करके कमाई 

अब हम इसमें ज्यादा मुनाफा कैसे कमा सकते है इसके लिए हमे थोड़ी मार्किट रिसर्च करनी पड़ती है जैसे हम सब्जी मण्डिओ में जाये या होटल्स में जाये और पता करे के कोनसी सब्जी महंगी है और डिमांड में रहती है जैसे ब्रोकली या मशरूम या फिर कोई सीज़नबल सब्जी जो कम समय में ज्यादा प्रोडक्शन दे पाए उन्हें उगाये और मार्किट में सेल करे | 

अपने आस पास लोकल मार्किट तैयार करके कमाई 

इसके अलावा अगर हम घर से भी काम करते है तो भी हमे इसी तरह की रणनीति तैयार करनी चाहिए इसके अलावा हम अपने आसपास के एरिया में प्रचार कर सकते है की हम इस प्रकार की केमिकल रहित पोस्टिक खेती करते है तो हमे हमारे आसपास के लोगो से ही अछि कमाई हो सकती है | 

विवाह समारोह में डायरेक्ट सब्जियाँ बेच करके कमाई 

इसके अलावा हमारे देश में विवाह समारोह बहुत होते है और उनमे खूब सब्जियों की आवशयकता पड़ती है तो हम सीजन के अकॉर्डिंग अच्छी फ्रेश सब्जिया तैयार कर सकते है और मार्किट की अछि रणनीति तैयार करके इन्हे उन कस्टमर्स को डायरेक्ट सेल कर सकते है इससे भी हमारा मुनाफा बहुत अच्छा होगा | 

फूलो की खेती करके कमाई 

हमारा देश त्योहारो ,विवाह समारोहों और अलग अलग धार्मिक और पर्सनल समारोहों का मनाने वाला देश है और इन सबमे सजावट बहुत ही अहम भूमिका निभाती है | और सजावट में जो सबसे अहम् होते है वे है फूल इसलिए हम इनकी खेती करके और इन्हे सेल करके अच्छी कमाई कर सकते है | 

हाइड्रोपोनिक फार्मिंग के लिए सरकार की स्कीम्स

बिना मिटटी और कम पानी वाली खेती को बढ़ावा देने के लिए हमारी सरकारों (राज्य और केंद्र) ने कई तरह की सब्सिडी प्लान तैयार कर रखे है जैसे बड़े स्टरक्चर को तैयार करने में जो खर्च आता है उसमे से आधा खर्च government खुद उठाती है इसके अलावा  अगर हमे लोन भी लेना हो तो उसकी व्यवस्था भी करवा देती है | 

सहकारी बीज भण्डारो से हमे अच्छे बीज सही दामों में मिल जाते है | 

समय समय पर government के कई ट्रेनिंग प्रोग्राम चलते रहते है जिसमे इस खेती के बारे बताया जाता है जिससे हमे इसके बारे में काफी कुछ सीखने को मिलता है | 

इसके अलावा इसमें क्या क्या और सरकारी updates आते रहते है उन्हें हम हमारे नजदीकी एग्रीकल्चर डिपार्मेंट से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं | 

इसके अलावा कुछ document भी जरुरी होते है हमे खुद को एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में खुद का एक फार्मर रजिस्ट्रेशन करवा लेना चाहिए | 

हाइड्रोपोनिक फार्मिंग में सोलर एनर्जी का उपयोग

हाइड्रोपोनिक खेती में हम अगर बिजली के बिल को कम करना चाहे तो हमे सोलर एनर्जी को काम में लेना चाहिए ताकि हमारा बिजली की जीतनी भी खपत हो वो सब सोलर एनर्जी से ही पूरी हो जाये | 

ये इसलिए भी जरुरी है क्योकि इसमें लगातार वाटर पंप चलते रहते है और इसके अलावा जो वातनाकुलित poly-house होते है उसमे कूलिंग करने के लिए कई प्रकार के वैंटिलेशन सिस्टम काम में लिए जाते है | इसलिए अगर हम सोलर एनर्जी प्लांट भी इस हाइड्रोपोनिक खेती के साथ मिला ले तो हमे अच्छा रिजल्ट मिल सकता है | 

आप सोलर एनर्जी और सोलर पैनल के बारे में यह से जानकारी प्राप्त कर सकते है 

सोलर एनर्जी और सोलर पैनल बिज़नेस क्या है इसे कैसे शुरू करे | How to start solar energy and solar panel business in Hindi

हाइड्रोपोनिक फार्मिंग से होने वाले लाभ | Profits by hydroponic farming 

हाइड्रोपोनिक फार्मिंग में कई तरह के लाभ है जिनके बारे हम बात करते है 

पानी का उपयोग कम 

इस खेती का सबसे बड़ा फायदा है की इसमें पानी सबसे कम यूज़ होता है  क्योकि पानी एक तो पाइप के एक सिरे जाता है और दूसरे सिरे से वापस आ जाता है फिर वही पानी वापस उसी पाइप में चला जाता है ये एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है और इसमें पानी का जो वाष्पीकरण  है वो बहुत ही कम होती है | इसमें साधारण खेती से 80 % कम पानी उपयोग होता है | 

जगह कम खर्च होती है 

क्योकि इसमें वर्टीकल खेती करते है यानि की खड़ी खेती तो इसमें हमे जगह कम खर्च लगता है और खेती भी ज्यादा होती है | 

आर्गेनिक कीटनाशक 

इसमें हम कम्पलीट आर्गेनिक कीटनाशक  का ही प्रयोग करते है जैसे नीम के तेल का स्प्रे | इसी लिए तो हमे इस खेती को करना जरुरी है क्योकि अगर आर्गेनिक फार्मिंग करनी है तो कीटनाशक रासायनिक नहीं यूज़ में  लिए जा सकते है | 

पैदावार 

पैदावार आम पारम्परिक खेती से लगभग 1.5 गुना ज्यादा होती है और जल्दी से फसल तैयार हो जाती है | 

हाइड्रोपोनिक फार्मिंग में होने वाली हानियाँ  | Drawback in hydroponics farming 

 इस प्रकार की खेती में लाभ के साथ कुछ हानियाँ भी होती है 

१. इसकी शरुआती कॉस्ट ज्यादा होती है इसलिए सब इस खेती को शुरू नहीं कर पाते है | 

२. टेक्निकल knowledge होना जरुरी है इसके बिना इसे किया नहीं जा सकता ये एक वैज्ञानिक पद्धति वाली खेती है | 

३. पानी की सप्लाई निरंतर होती रहनी चाहिए नहीं तो पौधे ख़राब हो जायेगे | 

४. पोषक तत्वों का pH और TDS समय – समय पर चेक करना पड़ता है नहीं तो हमारी फसल में कोई ना कोई कमी रह सकती है | 

५. पोलीहॉउस का तापमान नियंत्रित रहना चाइये 25 से 30  डिग्री  का तापमान ही रहना चाहिए  |   

सामान्य सवाल जवाब (FAQ)

NFT सिस्टम क्या है ?

नुट्रिएंट फिल्म technique इसका मतलब एक ऐसा सिस्टम जिसमे की पोषक तत्वों के साथ ज्यादा मात्रा में पानी को ढलान वाले हाइड्रोपोनिक सिस्टम के अंदर लगातार प्रवाहित करते रहना | 

हाइड्रोपोनिक फार्मिंग कितनी प्रकार की होती है ? 

NFT नुट्रिएंट फिल्म तकनीक , Airoponics , डीप वाटर कल्चर 

क्या हाइड्रोपोनिक खेती आर्गेनिक है ?

टेक्निकली हाइड्रोपोनिक खेती आर्गेनिक खेती ही है क्यों इसमें किसी प्रकार के केमिकल का  उपयोग नहीं किया जाता है | 

हाइड्रोपोनिक खेती कैसे काम करती है ? 

इस खेती में पोषक तत्वों युक्त पानी को निरन्तर पाइप्स में प्रवाहित किया जाता रहता है जहाँ पौधे अपनी जड़ो से पोषक तत्व ग्रहण करते है और बढ़ते रहते है | 

क्या छत पर hydroponic farming  की जा सकती है ?

जी हा बिलकुल घर की छत पर हाइड्रोपोनिक खेती कर सकते है इसके अलावा हम इंडोर कमरों में भी कृत्रिम लाइट के साथ इसकी खेती कर सकते है | 

क्या hydroponics खेती में मिट्टी का उपयोग किया जा सकता है ? 

नहीं , इसमें मिटटी का प्रयोग नहीं किया जा सकता है | 

ये रहा हमारा  Hydroponic farming क्या है ? Hydroponic farming से पैसे कैसे कमाये | व्यापार की योजना का ब्लॉग आर्टिकल उम्मीद करते है आप को ये काफी अच्छा लगा होगा कोई भी कमी होतो जरूर कमेंट बॉक्स में कमेंट करके बताये | 

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