अप्रैल में बोई जाने वाली फसल। april me boi jane wali sabji। april me konsi kheti kare।

अक्सर किसान भाई पूछते हैं अप्रैल में बोई जाने वाली फसल april me boi jane wali sabji और april me konsi kheti kare आदि के बारे में हमें कोई जानकारी दें इसलिए हम इस ब्लॉग में लेकर आए हैं कि april me boi jane wali sabji और अप्रैल में बोई जाने वाली फसलें।

april me boi jane wali sabji

अप्रैल में बोई जाने वाली फसल के लिए हम लगभग कुल 14 फसलों की जानकारी लेकर आए हैं और जिसमें से april me boi jane wali sabji में लगभग कुल 09 फसलों की जानकारी दी गई है तो आइए इन सभी फसलों और सब्जियों के बारे में थोड़ा विस्तार से जानते हैं।

Contents

अप्रैल में बोई जाने वाली फसल (april me konsi kheti kare):-

बेबी कॉर्न की खेती (baby corn ki kheti)

मूंग की खेती (mung ki kheti)

मूंगफली की खेती (mungfali ki kheti)

गन्ने की खेती (ganne ki kheti)

कपास की खेती (kapas ki kheti)

अप्रैल में बोई जाने वाली सब्जियां (april me boi jane wali sabji):-

लोबिया की खेती (lobia ki kheti)

हल्दी की खेती (haldi ki kheti)

भिंडी की खेती (bhindi ki kheti)

चौलाई की खेती (chaulai ki kheti)

लौकी की खेती (lauki ki kheti)

मूली की खेती (muli ki kheti)

चप्पन कद्दू की खेती (chappan kaddu ki kheti)

टमाटर की खेती (tamatar ki kheti)

धनिया की खेती (dhaniya ki kheti)

बेबी कॉर्न की खेती (baby corn ki kheti):-

किसान भाइयों अगर हम बेबी कॉर्न की खेती (baby corn ki kheti) अप्रैल माह में करते हैं तो इसकी अवधि लगभग 75 दिनों की होती है और बेबी कॉर्न को विदेशों में भारी मात्रा में उगाया जाता है और अब भारत में भी बेबी कॉर्न की खेती का चलन बढ़ता ही जा रहा है। और बेबी कॉर्न की खेती हम किसी भी मौसम में कर सकते हैं और इसका दाम भी बहुत अच्छा मिलता है। लेकिन उत्तर भारत में दिसंबर और जनवरी महीने को छोड़कर पूरे वर्ष baby corn ki kheti कर सकते हैं।

बेबी कॉर्न की किस्में (baby corn ki kisme):-

संकर-BL, संकर MEH-133, अर्ली कंपोजिट, पूसा अर्ली हाइब्रिड-01, पूसा अर्ली हाइब्रिड-02, पूसा अर्ली हाइब्रिड-03, आदि।

मूंग की खेती (mung ki kheti):-

अप्रैल माह में हमें मूंग की खेती करने के लिए हल्की क्षारीय लगभग 7 से 7.5 pH मान वाली भूमि की जरूरत होती है। मूंग की खेती ग्रीष्म ऋतु में ज्यादातर की जाती है।

मूंग की किस्में (mung ki kisme):-

वर्षा, सुनैना, अमृत, पंतमूंग-1, एमयूएम-2, पूसा विशाल, कृष्णा-11, पीएस-16, आदि।

मूंगफली की खेती (mungfali ki kheti):-

मूंगफली की खेती करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि मूंगफली की फसल अपनी वृद्धि और विकास के लिए लंबा गर्मी का मौसम पसंद करती है। मूंगफली की उत्तम खेती के लिए 21 से 27 डिग्री सेल्सियस तापमान अच्छा माना जाता है।

मूंगफली की किस्में (mungfali ki kisme):-

टाइप-28, एम-13, एम-145, एमएच-4, प्रकाश, टाइप-64, चंद्रा, ज्योति, चित्रा, कौशल, आदि।

गन्ने की खेती (ganne ki kheti):-

गन्ने की खेती में हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि गन्ना एक उष्ण कटिबन्धीय जलवायु की खेती है। हालांकि गन्ने को उपोष्ण कटिबन्धीय जलवायु में भी बोया जाता है।

गन्ने की किस्में (ganne ki kisme):-

को•शा•03225, को•शा•03251, को•शा•03252, को•शा•08272, को•शा•98259, को•शा•07250, आदि।

कपास की खेती (kapas ki kheti):-

कपास की खेती करते समय यह बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि कपास की शुरुआत में बढ़वार की अवस्था में ज्यादा तापमान और पर्याप्त नमी की जरूरत होती है और बाद की अवस्था में कम तापमान व ठंडी रातों की जरूरत होती है।

कपास की किस्में (kapas ki kisme):-

प्रतिमा, विकास, प्रमुख, बीकानेरी नर्मा, गंगानगर अगेती, श्यामली, लोहित, वारालक्ष्मी, सावित्री, गोदावरी, संजय, दिग्विजय, महालक्ष्मी, कृष्णा, लक्ष्मी, सुजाता, अंजली, गोरानी, जयाधर, आदि।

लोबिया की खेती (lobiya ki kheti):-

लोबिया की खेती करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि लोबिया की खेती लगभग सभी तरह की मिट्टियों में हो जाती है और इसको गर्म और नमीयुक्त जलवायु की जरूरत होती है।

लोबिया की किस्में (lobiya ki kisme):-

अर्का गरिमा, पूसा फाल्गुनी, पूसा बरसाती, पूसा कोमल, आदि।

हल्दी की खेती (haldi ki kheti):-

हल्दी की खेती करते समय यह ध्यान देना चाहिए कि खेत की मिट्टी का pH मान लगभग 5 से 7.5 तक ही रहे और हल्दी को लगभग सभी तरह की मिट्टियों में उगाया जा सकता है।

हल्दी की किस्में (haldi ki kisme):-

पालम पीताम्बर, पालम लालिमा हल्दी, कोयंबटूर हल्दी, कृष्णा, सवर्णा, सुदर्शन, आदि।

भिंडी की खेती (bhindi ki kheti):-

भिंडी की खेती करने के लिए यह जरूर याद रखना चाहिए कि भिंडी के बीजों के अच्छे जमाव के लिए 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है 20 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर बीज अंकुरित ही नहीं होते हैं।

भिंडी की किस्में (bhindi ki kisme):-

कल्याणपुर टाइप-1, कल्याणपुर टाइप-2, कल्याणपुर टाइप-3, कल्याणपुर टाइप-4, पूसा सावनी, पूसा मखमली, हरभजन भिंडी, पंजाब पद्मिनी, परभनी क्रांति, अर्का अनामिका, आदि।

चौलाई की खेती (chaulai ki kheti):-

चौलाई की खेती करने के लिए भूमि का pH मान लगभग 6 से 7 तक होना अच्छा माना जाता है और अगर वहीं अगर pH मान ज्यादा अम्लीय हो जाता है या ज्यादा क्षारीय हो जाता है तो यह चौलाई की खेती के लिए दिक्कत हो जाती है।

चौलाई की किस्में (chaulai ki kisme):-

कपिलासा, आरएमए-4, छोटी चौलाई, बड़ी चौलाई, पूसा लाल, अन्नपूर्णा, सुवर्णा, आदि।

लौकी की खेती (lauki ki kheti):-

लौकी की खेती आमतौर पर गर्मी और बारिश के मौसम में की जाती है क्योंकि लौकी पाले को सहन नहीं कर सकती है जीवांश सहित हल्की दोमट मिट्टी वाली भूमि लौकी की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है।

लौकी की किस्में (lauki ki kisme):-

अर्का बहार, अर्का गंगा, काशी कीर्ति, सम्राट, पूसा नवीन, अर्का नूतन, अर्का श्रेयस, आदि।

मूली की खेती (muli ki kheti):-

मूली की खेती को पहाड़ी तथा मैदानी इलाकों में भी किया जाता है मूली की अच्छी खेती के लिए हल्की दोमट या बलुई दोमट मिट्टी बहुत अच्छी मानी जाती है।

मूली की किस्में (muli ki kisme):-

जापानी सफेद, पूसा हिमानी, पूसा चेतकी, पूसा रेशमी, जौनपुरी मूली, पूसा देशी, आदि।

चप्पन कद्दू की खेती (chappan kaddu ki kheti):-

चप्पन कद्दू की खेती बलुई दोमट मिट्टी में सबसे अच्छी रहती है चप्पन कद्दू के फलों का विकास ठंडी के मौसम में अच्छा होता है।

चप्पन कद्दू की किस्में (chappan kaddu ki kisme):-

ऑस्ट्रेलियन ग्रीन, पूसा अलंकार, अर्ली यलो प्रोलिफिक, मैक्सिको चप्पन कद्दू, पंजाब चप्पन कद्दू, आदि।

टमाटर की खेती (tamatar ki kheti):-

टमाटर की खेती लाल, काली और रेतीली दोमट मिट्टी में बहुत ही आसानी से की जा सकती है। टमाटर की अच्छी पैदावार के लिए pH मान 7 से 8.5 होना चाहिए। यदि टमाटर की खेती गर्मियों के मौसम में की गई है तो हर एक सप्ताह के बाद सिंचाई करनी चाहिए।

टमाटर की किस्में (tamatar ki kisme):-

पूसा शीतल, पूसा गौरव, पूसा रूबी, अर्का विकास, अर्का सौरभ, सोनाली, रश्मि, अविनाश-2, आदि।

धनिया की खेती (dhaniya ki kheti):-

धनिया की खेती करने के लिए मटियार और दोमट मिट्टी बहुत अच्छी मानी जाती है। धनिया की फसल को नम तथा ठंडे मौसम की जरूरत होती है।

धनिया की किस्में (dhaniya ki kisme):-

पंत हरितमा, कुंभराज, हिसार सुगंध, आरसीआर-41, आरसीआर-435, आरसीआर-436, आरसीआर-446, आरसीआर-684, आरसीआर-480, आरसीआर-728, आदि।

विशेष जानकारी:-

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इस ब्लॉग पोस्ट में हमनें बात की कि अप्रैल में बोई जाने वाली फसल april me boi jane wali sabji और april me konsi kheti kare

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