खुबानी की खेती कैसे होती है | Apricot Farming in Hindi | खुबानी की कीमत

एक वयस्क व्यक्ति इसके दो से तीन बीजो को खा सकते है, किन्तु बच्चो को इसके बीजो का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योकि यह धीमा जहर होता है | खुबानी के ताज़े फलो से जैम, जूस, जैली और चटनी बनायीं जाती है, तथा शुष्क फलो का सेवन सूखे मेवे के रूप में कर सकते है | खुबानी के पौधों के लिए शीतोष्ण और समशीतोष्ण जलवायु उपयुक्त होती है | यदि आप भी खुबानी की खेती करने में दिलचस्पी रखते है, तो इस लेख में आपको खुबानी की खेती कैसे होती है (Apricot Farming in Hindi) और खुबानी की कीमत के बारे में बता रहे है |

खुबानी की खेती कैसे होती है

Contents

खुबानी की खेती (Apricot Farming) से सम्बंधित जानकारी

खुबानी की खेती गुठली वर्गीय फसल के लिए की जाती है | इसका उत्पादन नगदी फसल के लिए करते है | भारत में खुबानी को चोले नाम से भी जानते है, जिसके फल के अंदर गुठली निकलती है | खुबानी को आलू बुखार और आडू प्रजाति का फल कहते है | पूरी दुनिया में खुबानी की खेती सबसे अधिक तुर्की में की जाती है, तथा भारत में इसे हिमालय वाले क्षेत्रों में करते है, जिसमे उत्तराखंड, हिमाचल और कश्मीर राज्य शामिल है| इसके पौधे की ऊंचाई सामान्य होती है | जिसमे गुलाबी, काले, पीले, सफ़ेद और भूरे रंग के फल निकलते है, तथा फल के अंदर बादाम की तरह बीज निकलता है |

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खुबानी की खेती में सहायक मिट्टी (Apricot Cultivation Auxiliary Soil)

खुबानी के पौधों को उचित जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी की जरूरत होती है | बलुई दोमट मिट्टी भी खुबानी की खेती के लिए उपयुक्त होती है, तथा भूमि का P.H. मान 7 होना चाहिए | जलभराव और कठोर भूमि में इसकी खेती बिल्कुल न करे |

खुबानी की खेती में उपयुक्त जलवायु (Apricot Cultivation Suitable Climate)

समुद्र तल से 1000 से 2000 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खुबानी की खेती आसानी से की जा सकती है | खुबानी के पौधे शीतोष्ण और समशीतोष्ण दोनों ही तरह की जलवायु में अच्छे से विकास कर सकते है |

समशीतोष्ण क्षेत्र जहां पर अधिक समय तक गर्म जलवायु रहती है | वहां इसकी खेती बिल्कुल न करे | क्योकि अधिक समय तक गर्म जलवायु होने पर फलन क्रिया प्रभावित होती है | सर्दी का मौसम पौधों के लिए उपयुक्त होता है | किन्तु पौधों पर फूल बनने के दौरान ठंडी में गिरने वालेपाला हानि पहुचाता है | इसके पौधों के लिए सामान्य बारिश उपयुक्त होती है |

सामान्य तापमान खुबानी की खेती के लिए उपयुक्त होता है, तथा पौध विकास कम तापमान में अच्छे से होता है | इसके पौधों को फल विकास के दौरान 700 से 800 घंटो तक 7 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है | 5 डिग्री से कम तापमान होने पर फूल ख़राब होने लगते है |

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खुबानी की उन्नत किस्में (Apricot Improved Varieties)

कैशा

खुबानी की यह क़िस्म कम समय में पैदावार देने के लिए तैयार हो जाती है | इस क़िस्म के पौधों पर फल जून के आरम्भ में ही आना शुरू कर देते है | इस क़िस्म में फलो का आकार गोल और सामान्य होता है, जिनका बाहरी आवरण लालिमा लिए हुए पीले रंग का होता है |

गौरव लाल गाल खुबानी

इस क़िस्म के पौधों को तैयार होने में 4 वर्ष का समय लग जाता है | जिसमे निकलने वाले फल का स्वाद मीठा होता है | 15 वर्ष बाद इसके एक पेड़ से 70 से 100 KG की पैदावार मिल जाती है | इसका पौधा अधिक समय तक गर्म जलवायु सहन कर सकता है, जिस वजह से इसके फलो को भंडारण के लिए उपयुक्त माना जाता है |

काला मखमल

यह खुबानी की एक संकर क़िस्म है, जिसे अमेरिकी खुबानी और चेरी बेर का संकरण कर तैयार किया गया है | इसके पौधे कम ऊंचाई वाले होते है, और पौधों पर फल भी देरी से आते है | इसके फल अगस्त माह तक पककर तैयार होते है, जिनका रंग काला होता है | इस क़िस्म की खुबानी से अचार भीबनाते है |

मेलिटोपोल ब्लैक

खुबानी की इस क़िस्म में फल बाहर से काले रंग के होते है, जिनके अंदर का गुदा लाल रंग का होता है| यह क़िस्म अधिक ठंडे के प्रति सहनशील होती है| इस क़िस्म के फलो का उत्पादन जुलाई के महीने में आरम्भ होता है, तथा उपज भी सामान्य मिलती है |

अनानास खुबानी

इस क़िस्म के फल चौथे वर्ष उपज देना शुरू कर देते है, तथा पूर्ण विकसित वृक्ष एक वर्ष में 100 से 125 KG की पैदावार दे देता है | यह क़िस्म जुलाई माह में फलो का उत्पादन देना आरम्भ कर देती है, जिसमे पीले रंग के फल निकलते है | इसका पौधा भी सर्दी के प्रति सहन शील होता है |

चारमग्ज

खुबानी की यह क़िस्म कम समय में पैदावार देने के लिए जानी जाती है, जिसके फलो का उत्पादन जून के महीने में आरम्भ होता है | इसका पूर्ण विकसित पौधा 80 KG की पैदावार दे देता है | इस क़िस्म के फलो का स्वाद मीठा होता है, तथा देखने में हरापन लिए हुए पीले रंग के होते है |

ब्लैक प्रिंस

खुबानी की यह एक संकर क़िस्म है | जिमसे पौधे सामान्य ऊंचाई के होते है, तथा फल लाल रंग के होते है | यह क़िस्म अन्य संकर किस्मो की तुलना में अधिक उत्पादन दे देती है | इस क़िस्म के पौधों में बहुत ही कम रोग लगते है, तथा अधिक ठंड पौधों के लिए उपयुक्त नहीं होती है |

सफेदा

यह क़िस्म मध्य समय में उत्पादन देने के लिए जानी जाती है | इसके पौधों पर फल बड़े आकार के निकलते है | इसका एक पोधा 100 KG की पैदावार दे देता है | इसमें फल हल्के पीले रंग के होते है, जो जुलाई के महीने में तुड़ाई के लिए तैयार होते है |

इसके अतिरिक्त भी खुबानी की कई किस्में उगाई जाती है, जिन्हे अलग-अलग जलवायु और उत्तम पैदावार के लिए उगाया जाता है | इसमें नरी, सेन्ट एम्ब्रियोज, नगेट, शक्करपारा, रायल, एलेक्स, नाटी, पैरा पैरोला और वुल्कान जैसी किस्में शामिल है |

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खुबानी के खेत की तैयारी (Apricot Field Preparation)

खुबानी के पौधों को खेत में लगाने के लिए गड्डो को तैयार कर लिया जाता है | गड्डे तैयार करने से पूर्व खेत की मिट्टी को भुरभुरा करना होता है | इसके लिए आरम्भ में खेत को साफ कर मिट्टी पलटने वाले हलो से खेत की गहरी जुताई की जाती है | जिसके बाद रोटावेटर से जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा कर देते है | भुरभुरी मिट्टी को समतल करने के लिए खेत में पाटा लगा दे | इससे बारिश के मौसम में खेत में जलभराव नहीं होता है |

समतल भूमि को गड्डे तैयार किये जाते है, यह सभी गड्डे पंक्तियों में तैयार किये जाते है | इस दौरान गड्डे से गड्डे के मध्य 5 से 6 मीटर की दूरी रखते है, और पंक्ति से पंक्ति के मध्य 5 मीटर की दूरी होनी चाहिए

इसके बाद तैयार गड्डो में जैविक और रासायनिक उवर्रक की उचित मात्रा को मिट्टी में मिलाकर गड्डो में भरना होता है | गड्डे भरने के पश्चात उनकी गहरी सिंचाई कर दी जाती है, ताकि गड्डे की मिट्टी ठीक से बैठकर कठोर हो जाए| इन गड्डो को पौध रोपाई से तक़रीबन तीन माह पूर्व तैयार कर ले |

खुबानी के पौध की तैयारी (Apricot Seedlings Preparation)

खुबानी की पौध को लगाने के लिए नर्सरी में कलम को तैयार किया जाता है | इसकी कलम को कलम डाब, ग्राफ्टिंग, गुटी बांधने और कलम बीज की विधि से तैयार करते है | इस सभी विधियों में कलम से तैयार पौधों में मुख्य पौधे के जैसे ही गुण पाए जाते है | किन्तु बीज विधि द्वारा तैयार कलम के पौधों में मुख्य पौधों की तुलना में कम गुण होते है| इसकी पौध को नर्सरी में बारिश या बारिश के मौसम के बाद तैयार कर सकते है, जिसकी रोपाई बसंत ऋतु के मौसम में होती है |

आज के समय में सरकार द्वारा रजिस्टर्ड कई नर्सरी मौजूद है, जिनसे कम रुपयों में भी पौध खरीदी जा सकती है | इसलिए किसान भाई डायरेक्ट नर्सरी से भी खुबानी की पौध खरीद सकते है | पौध खरीदते समय इस बात का विशेष ध्यान रखे कि पौधे बिल्कुल स्वस्थ होने चाहिए, ताकि पौधों का विकास ठीक तरह से हो सके |

खुबानी के पौधों की रोपाई (Planting Apricot Plants)

खुबानी के पौधों को खेत में तैयार गड्डो में लगाया जाता है | इसके लिए गड्डो के मध्य में एक छोटा सा गड्डा तैयार कर लेते है | गड्डा तैयार करने के पश्चात उसे गोमूत्र या बाविस्टिन की मात्रा से उपचारित करते है | इसके बाद नर्सरी में तैयार की गई पौध को गड्डो में लगा देते है | इसके बाद चारो तरह मिट्टी डालकर पौधों को कुछ ऊंचाई तक ढक देते है |

खुबानी के पौध की रोपाई मार्च, जुलाई, और अगस्त के महीने तक कर सकते है | जहां सिंचाई की उचित व्यवस्था हो वहां पौधों को मार्च के महीने में लगाए | इस समय पौधों को अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है | असिंचित जगहों पर जून के महीने में पौधों को लगा सकते है | इस दौरान बारिश का मौसम होता है, जिससे पौधों को विकास करने के लिए उचित माहौल मिल जाता है |

खुबानी के पौधों की सिंचाई (Apricot Plants Irrigation)

खुबानी के पौधों को सामान्य सिंचाई की जरूरत होती है | गर्मियों के मौसम में पौधों को तीन से चार बार पानी देना होता है, तथा सर्दियों के मौसम में कम पानी की जरूरत होती है | गर्मी के मौसम में पौधों की सिंचाई 7 से 9 दिन के अंतराल में की जाती है, तथा सर्दियों के मौसम में 20 से 25 दिन के अंतराल में पौधों को पानी देना होता है | बारिश के मौसम में यदि समय पर बारिश नहीं हो तो जरूरत के अनुसार ही पानी दे | खुबानी के पौधों की सिंचाई के लिए ड्रिप विधि का इस्तेमाल बेहतर माना जाता है |

खुबानी के पौधों में खरपतवार नियंत्रण (Apricot Plants Weed Control)

खुबानी के पौधों में खरपतवार रोकने के लिए प्राकृतिक तरीके का इस्तेमाल करते है | इसके लिए आरंभ में पोध रोपाई के एक माह पश्चात् पौध के समीप खरपतवार दिखाई देने पर उसकी हल्की गुड़ाई कर दे | इसके पौधों को अधिकतम 7 से 8 गुड़ाई की आवश्यकता होती है | किन्तु पूर्ण रूप से तैयार पौधों की वर्ष में तीन से चार गुड़ाई करे | यदि खेत में ख़ाली पड़ी भूमि पर अतिरिक्त फसल नहीं उगाई गई है, तो बारिश के मौसम के बाद हल्की जुताई कर दे |

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खुबानी के पौध रोग व उपचार (Apricot Plant Diseases and Treatment)

रोगरोग का प्रकारउपचार
मोनिलियल बर्नजलभरावरोगग्रस्त डालियों की चटाई करे, और खेत में जल भराव न होने दें|
ग्रे सड़ांधरोगबोर्डेक्स तरल मिश्रण या क्वाड्रिस दवा का छिड़काव पौधों पर करे, तथा रोगग्रस्त को तोड़कर हटा दे|
इंडियन जिप्सी मोथकीटकार्बारिल दवा की उचित मात्रा का छिड़काव पौधों पर करे|
पर्ण चित्तीगहरे भूरे रंग के धब्बेफिटोस्पोरिन-एम या फंडाज़ोल का छिड़काव पौधों पर करे|
पत्ती मरोड़कीट जनित रोगकॉपर ऑक्सीक्लोराइड और थिरम का छिड़काव पेड़ो पर करे|

खुबानी के फलों की तुड़ाई (Apricot Fruit Picking)

खुबानी के पौधे रोपाई के तक़रीबन 3 से 4 वर्ष बाद पैदावार देना आरम्भ करते है | इसके पौधों पर फलन अप्रैल के माह से आरंभ होता है | इसके अलावा अन्य किस्में जून से लेकर जुलाई तक तैयार होती है | इसके फलो को पूर्ण रूप से पकने से पहले तोड़ ले | ताकि फल अधिक दूरी तक भेजा जा सके |

खुबानी के पके हुए फलो का रंग किस्मों के आधार पर भिन्न – भिन्न होता है | जब इसका फल नर्म हो जाए तब फलो की तुड़ाई कर ले, इसके बाद गुणवत्ता के आधार पर फलो की छटाई कर बॉक्स में जमा कर बाजार में बेचने के लिए भेज दे |

खुबानी की कीमत (Apricot Price)

खुबानी का पूर्ण विकसित पौधा 50 से 60 वर्षो तक उपज दे देता है | उन्नत किस्मो के आधार पर पूर्ण रूप से तैयार एक पेड़ से तक़रीबन 80 KG का उत्पादन प्रति वर्ष प्राप्त हो जाता है | खुबानी का बाज़ारी भाव 100 से 120 रूपए प्रति किलो होता है | इस हिसाब से यदि किसान भाई एक हेक्टेयर के खेत में खुबानी के पौधों को उगाते है, तो वह एक बार की फसल से 20 लाख तक की कमाई कर सकते है |

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