दोस्तों से उधार लेकर इंजीनियर ने शुरू की खेती, 12 राज्यों के 200 किसानों की बढ़ाई आमदनी

Agriculture business success story , संदीप ने ‘फार्मर्स प्राइड’ नाम से देश का पहला ऐसा प्रयोग किया है, जो सीधे किसानों की ब्रांडिंग करता है। उनकी एप पर हर प्रोडक्ट के सामने उसे उगाने वाले जैविक किसान का नाम, फोटो और पता लिखा होता है।

Farmers Pride Success Story

भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम हमेशा कहते थे कि भारत को अपने गाँव की तरफ विशेष ध्यान देना होगा। वह शिक्षित युवाओं से गाँव की ओर लौटने की अपील करते थे। डॉ. कलाम की अपील से ही प्रभावित होकर 2002 में मध्यप्रदेश के शिवपुरी के निवासी संदीप शर्मा गाँव लौट आए। आज संदीप देश के 12 राज्यों के 200 से ज्यादा जैविक किसानों  की ब्रांडिंग कर उनकी आमदनी बढ़ाने का जरिया बन चुके हैं। इसके लिए वह वेबसाइट और मोबाइल एप जैसी तकनीक का  इस्तेमाल कर रहे हैं।

Sandeep Farmers Pride

संदीप ने बताया, “डॉ. कलाम अक्सर युवाओं को गाँव की तरफ लौटकर स्वरोजगार करने के लिए कहा करते थे। उनकी बात मुझे जच गयी। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान मैं छात्रों के स्वरोजगार के लिए ‘टेक्निकल टुडे’ मैगजीन भी निकाला करता था। मैगजीन के जरिए हमने मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के करीब 150 इंजीनियरिंग कॉलेज के 2500 से ज्यादा छात्रों को जोड़ा। हम अपनी मैगजीन में पॉजिटिव खबरों के साथ-साथ डॉ. कलाम के विचारों को जगह देते थे।”

संदीप की 2007 में एपीजे अब्दुल कलाम से मुलाकात भी हुई थी। पूर्व राष्ट्रपति ने उनके द्वारा संपादित पत्रिका ‘समाधान’ का विमोचन किया था।

इसी दौरान उनकी मुलाकात राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति एमसी गुप्ता से हुई। गुप्ता ने उन्हें सलाह दी कि वह बेरोजगार लोगों को स्वरोजगार शुरू करने का रास्ता दिखाएं।

इस सलाह को मानते हुए संदीप ग्रामीण भारत की यात्रा पर निकल गए। 2003 से 2013 तक उन्होंने तकरीबन 10 राज्यों के 200 से अधिक ग्रामीण इलाकों की यात्रा की और गाँव की जीवन शैली को समझने की कोशिश की।

इस दौरान उन्होंने देशी गौ-पालन, मधुमक्खी पालन, जैविक खेती, फूड प्रोसेसिंग और आयुर्वेद के बारे में अधिक से अधिक जानने की कोशिश की

इस तरह संदीप शर्मा ने 10 साल के अपने अनुभवों को आधार बनाकर अपने 17 मित्रों से पैसा उधार लेकर बिलासपुर के एक गांव में 10 एकड़ जमीन खरीदी और 2013 में खुद ही जैविक खेती से नए-नए प्रयोग करना शुरू कर दिए। इस प्रयोग में नाबार्ड के डीडीएम कमल पटनायक और स्थानीय कलेक्टर अन्बलगन पी. ने काफी सहयोग किया। उन्होंने उनके प्रयोग को समझा और संदीप को स्थानीय लोगों से जुड़ने में काफी मदद की।

कई जैविक खेती के प्रशिक्षण और प्रयोग चार वर्षों तक करने के बाद संदीप ने जैविक उत्पादन तो कर लिया, लेकिन इसे सही कीमत पर बेचने में काफी दिक्कतें आई। जोकि लगभग सभी जैविक किसानों की भी सबसे बड़ी समस्या थी।

Farmers Pride Website

इस समस्या का हल निकलने के लिए संदीप ने 2017 में जैविक खेती को किसान के गौरव और उसकी पहचान के साथ जोड़कर ‘फार्मर्स प्राइड’ नाम से नया प्रयोग शुरू किया। इस प्लेटफार्म के माध्यम से उन्होंने किसानों के जैविक उत्पाद जैसे दाल, चावल, तेल गुड़ आदि बेचना शुरू किया। उन्होंने वेबसाइट और मोबाइल एप के माध्यम से  हर शहर के ग्राहकों को अपने साथ जोड़ा।

संदीप का कहना है कि यह अपने आप में देश का पहला ऐसा प्रयोग है, जो सीधे किसान की ब्रांडिंग कर रहा है। वेबसाइट पर हर प्रोडक्ट के सामने उसे पैदा करने वाले जैविक किसान का नाम, फोटो और पता लिखा रहता है। इससे उत्पादक और उपभोक्ता के बीच संबंध जुड़ता है और किसान का गौरव बढ़ता है।

उन्होंने कहा, “हम किसान के लोकेशन के साथ-साथ स्टॉक की भी जानकारी देते हैं। किसानों के उत्पाद को हमने ना सिर्फ बाजार तक पहुँचाया, बल्कि गोल्फ जैसे महंगे खेल और कई प्रकार के राष्ट्रीय और लोकल आयोजनों में जाकर जैविक किसानों की ब्रांडिंग भी की। अब इन किसानों को स्थानीय लोग जानने लगे हैं। उन्हें स्थानीय बाजार भी मिलने लगा है।”

टाटा समूह, अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स, दिल्ली गोल्फ क्लब, गोल्फ फाउंडेशन, सिंधिया फाउंडेशन जैसी बड़ी संस्थाओं के सहयोग से 2019 में आयोजित 8 गोल्फ टूर्नामेंट के माध्यम से संपन्न परिवारों के बीच फार्मर्स प्राइड ने अपनी जगह बनाई है।

उन्होंने कहा,  “दुनिया के सबसे महंगे खेल में बेशकीमती प्राइज में  किसान के जैविक उत्पादों को भी शामिल करवा दिया, इस नई परंपरा से किसान गौरवान्वित हो रहे हैं। कपिल देव, टेनिस प्लेयर लिएंडर पेस, मिस इंडिया नेहा जायसवाल, बॉलीवुड अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह जैसी दिग्गज हस्तियों ने जैविक किसानों की इस अभियान को अपना समर्थन दिया है।”

15 राज्यों के 200 से ज्यादा किसानों की टीम

संदीप ने कहा कि 2012 अकेले इस काम की शुरुआत अकेले की थी लेकिन आज उनके साथ 15 राज्यों के 200 से ज्यादा किसानों की टीम है जो करीब 2000 एकड़ में जैविक खेती करते हैं। ये सभी लगभग 100 प्रमाणित जैविक उत्पादों को तैयार करते हैं।

संदीप कहते हैं, “फार्मर्स प्राइड टीम वह सभी काम करती है जो एक किसान के लिए खेती के साथ करना मुश्किल होता है। इन कामों में जैविक उत्पादन की गुणवत्ता की टेस्टिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग, डिलीवरी और टेक्निकल सपोर्ट जैसे काम शामिल हैं। बिलासपुर और नोएडा में 25 लोगों की टीम मिलकर काम करती है। उनके उत्पाद की देश ही नहीं विदेशों में भी मांग है।”

बिट्स के छात्र कर रहे हैं इंटर्नशिप

इंजीनियरिंग की डिग्री के बिना खड़ी हो चुकी फार्मर्स प्राइड टीम के साथ अब देश के प्रतिष्ठित बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी ऑफ साइंस (बिट्स) पिलानी के छात्र इंटर्नशिप करने आने लगे हैं। बिट्स पिलानी ने देश की चुनी हुई लगभग 200 बड़ी कंपनियों की लिस्ट में फार्मर्स प्राइड को शामिल किया है।

संदीप शर्मा कहते हैं कि जैविक उत्पादों की मांग बढ़ी है। वह कहते हैं, “रासायनिक खेती के कारण भोजन की गुणवत्ता घट गई है। इसलिए शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता कम होती जा रही है। इसी का नतीजा है कि कोरोना जैसी बीमारियों से निपटना मुश्किल हो रहा है। इस तरह की बीमारियों से बचाव के लिए गुणवत्ता वाला पौष्टिक भोजन जरूरी है। इसी का नतीजा है कि जैविक उत्पादों की कोरोना काल में मांग बढ़ी है।”

आप www.farmerspride.in या फिर 7987551332 के माध्यम से जैविक किसानों के इस अभियान से जुड़ सकते हैं।

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